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Friendship

Within the Darkness – The Story of Gandhari

अठारहवें दिन की शाम को, जब युद्ध समाप्त हो चुका था, गांधारी ने पहली बार अपनी आँखों की पट्टी खोली।…

14-June-2026 · 7 min
Biography

जब आवाज़ कमरे में रह गई, ज़माना बाहर निकल गया — ज़ोहराबाई अम्बालेवाली की कहानी

बम्बई, 1952। रेकॉर्डिंग स्टूडियो की सीढ़ियाँ उतरते हुए ज़ोहराबाई के हाथ में वही पुराना काला पर्स था जो उन्होंने 1944…

14-June-2026 · 5 min
Inspirational

रात के पौने ग्यारह बजे थे जब मीरा ने अलमारी से वो छोटा नीला बैग निकाला, जो किसी ज़माने में बेटी के स्कूल पिकनिक का बैग हुआ करता था।

बैग पर अब भी एक कार्टून मछली बनी थी, जिसका एक पंख धुलते-धुलते फीका पड़ गया था। मीरा कुछ देर…

06-June-2026 · 7 min

Biography

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जब आवाज़ कमरे में रह गई, ज़माना बाहर निकल गया — ज़ोहराबाई अम्बालेवाली की कहानी
Biography

जब आवाज़ कमरे में रह गई, ज़माना बाहर निकल गया — ज़ोहराबाई अम्बालेवाली की कहानी

बम्बई, 1952। रेकॉर्डिंग स्टूडियो की सीढ़ियाँ उतरते हुए ज़ोहराबाई के हाथ में वही पुराना काला पर्स था जो उन्होंने 1944 में रत्तन की रेकॉर्डिंग के दिन भी थाम रखा था। उस दिन नौशाद साहब ने कहा था — "ज़ोहराबाई, आज आपने कमाल कर दिया।" आज किसी ने कुछ नहीं कहा। असिस्टेंट ने बस इतना कहा था: "साहब का कहना है… आवाज़ थोड़ी… भारी लगती है इस गाने के लिए।" भारी। वो शब्द सीढ़ियाँ उतरते हुए उनके साथ आया। ताँगे में बैठते हुए भी रहा। घर के दरवाज़े तक। आवाज़ तो हमेशा से भारी थी। अम्बाला में, नाना के घर में,…

14-June-2026 5 min read

Inspirational

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Inspirational

एक शराबी का आखिरी दिन

सुबह छह बजे महेश की आँख खुली तो सबसे पहले उसके दाहिने हाथ ने काँपना शुरू किया। ये कोई नई बात नहीं थी। बीस साल…

14-June-2026 9 min read
Inspirational

रात के पौने ग्यारह बजे थे जब मीरा ने अलमारी से वो छोटा नीला बैग निकाला, जो किसी ज़माने में बेटी के स्कूल पिकनिक का बैग हुआ करता था।

बैग पर अब भी एक कार्टून मछली बनी थी, जिसका एक पंख धुलते-धुलते फीका पड़ गया था। मीरा कुछ देर उसे हाथ में पकड़े खड़ी…

06-June-2026 7 min read
Inspirational

सुबह जो ठहर गई

बंद कमरे की खिड़की से बाहर मुंबई जाग रही थी — हॉर्न, कौवे, किसी इमारत में चलता पानी का मोटर। पर कमरे के अंदर सब…

31-May-2026 7 min read

Mythology

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अहिल्या की रात
History

अहिल्या की रात

12 मई, 1767 की दोपहर थी। महेश्वर के राजमहल के पीछे, नर्मदा के किनारे, एक चिता तैयार हो रही थी। लकड़ियाँ सूखी थीं। चंदन का तेल पास रखा था। पुरोहित मंत्र दोहरा रहे थे जैसे कोई उन्हें सुन ही नहीं रहा। और महल के भीतर, एक कमरे में, अहिल्याबाई होलकर अपने बेटे मालेराव की लाश के पास बैठी थीं। बेटा बीस साल का था। नौ महीने पहले राजा बना था। आज सुबह मर गया। उससे पहले — बारह साल पहले — पति खंडेराव कुम्भेर के युद्ध में मारा गया था। तब अहिल्या उनतीस की थीं। तब भी चिता पर चढ़ने…

01-June-2026 7 min read
Children

टिमटिमाते जुगनू और काली रात

रिमझिम सबसे छोटा जुगनू था। इतना छोटा कि जब वो उड़ता, तो उसकी रोशनी ज़मीन तक भी मुश्किल से पहुँचती। बाकी जुगनू उसे देखकर हँसते।…

25-May-2026 5 min read
Children

नन्हे हाथी और रात का फूल

जंगल में सबसे पुराना पेड़ था बरगद बाबा। उनकी जड़ें ज़मीन के नीचे इतनी दूर तक फैली थीं कि वो जानते थे कौन सी चींटी…

19-May-2026 6 min read
Children

लकड़हारा और छोटा होता पेड़

जंगल के उस कोने में कोई नहीं आता था जहाँ हरिया लकड़ी काटने जाता था। पेड़ वहाँ टेढ़े-मेढ़े थे, ज़मीन पथरीली थी, और रास्ता ऐसा…

16-May-2026 7 min read

Lifestyle

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रात के पौने ग्यारह बजे थे जब मीरा ने अलमारी से वो छोटा नीला बैग निकाला, जो किसी ज़माने में बेटी के स्कूल पिकनिक का बैग हुआ करता था।
Inspirational

रात के पौने ग्यारह बजे थे जब मीरा ने अलमारी से वो छोटा नीला बैग निकाला, जो किसी ज़माने में बेटी के स्कूल पिकनिक का बैग हुआ करता था।

बैग पर अब भी एक कार्टून मछली बनी थी, जिसका एक पंख धुलते-धुलते फीका पड़ गया था। मीरा कुछ देर उसे हाथ में पकड़े खड़ी रही। कल इसी बैग को लेकर उसे अस्पताल जाना था — अपनी पहली कीमोथेरेपी के लिए। लखनऊ की उस गली में इस वक़्त सिर्फ़ एक कुत्ते के भौंकने की आवाज़ आ रही थी। बाक़ी सब चुप था। पति राकेश दूसरे कमरे में सोने का नाटक कर रहे थे — मीरा को पता था कि वो सो नहीं रहे। पिछले बारह दिनों से इस घर में कोई ठीक से सोया नहीं था। बारह दिन पहले डॉक्टर…

06-June-2026 7 min read
Inspirational

अरुणिमा सिन्हा की कहानी: जिंदगी की रेस में हारना नहीं, जीतना है!

“क्या आपने कभी महसूस किया है कि आपकी ज़िंदगी एक रेस है? एक ऐसी रेस, जिसमें हर कदम पर चुनौतियाँ और मुश्किलें आपका रास्ता रोकती…

03-September-2025 9 min read
Biography

छत्रपति शिवाजी महाराज: एक ऐसे नायक की कहानी, जिसने मुगलों के सामने भी नहीं झुकाया सिर

एक शाम, महाराष्ट्र के सह्याद्रि पहाड़ों की गोद में बसे एक छोटे से गाँव में, दादाजी कोंडदेव अपने पोते के साथ बैठे थे। सूरज ढल…

01-September-2025 11 min read

Fictional

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Friendship

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Within the Darkness – The Story of Gandhari
Friendship

Within the Darkness – The Story of Gandhari

अठारहवें दिन की शाम को, जब युद्ध समाप्त हो चुका था, गांधारी ने पहली बार अपनी आँखों की पट्टी खोली। एकतीस वर्ष। एकतीस वर्ष से उसकी आँखें इस पट्टी के पीछे बंद थीं। पट्टी जिसे उसने गांधार में अपने विवाह की रात, अपने हाथों से बाँधा था। रेशमी कपड़े की वो पट्टी — जो प्रेम थी, जो प्रतिज्ञा थी, जो उसने सोचा था कि पुण्य है। रोशनी आँखों में चुभी। जैसे किसी ने लोहे की सुई चुभो दी हो। और फिर उसने देखा। कुरुक्षेत्र का वो मैदान जो अब कब्रिस्तान था। दुर्योधन — उसका पहलौठा बेटा — जमीन पर पड़ा…

14-June-2026 7 min read