एक शराबी का आखिरी दिन
सुबह छह बजे महेश की आँख खुली तो सबसे पहले उसके दाहिने हाथ ने काँपना शुरू किया। ये कोई नई…
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सुबह छह बजे महेश की आँख खुली तो सबसे पहले उसके दाहिने हाथ ने काँपना शुरू किया। ये कोई नई…
अठारहवें दिन की शाम को, जब युद्ध समाप्त हो चुका था, गांधारी ने पहली बार अपनी आँखों की पट्टी खोली।…
बम्बई, 1952। रेकॉर्डिंग स्टूडियो की सीढ़ियाँ उतरते हुए ज़ोहराबाई के हाथ में वही पुराना काला पर्स था जो उन्होंने 1944…
बैग पर अब भी एक कार्टून मछली बनी थी, जिसका एक पंख धुलते-धुलते फीका पड़ गया था। मीरा कुछ देर…
एक जुलाई की सुबह, जब सातवीं बी के बच्चे अपनी नई क्लास में घुस रहे थे, हरिप्रसाद शर्मा भोपाल के…
फ़िलाडेल्फ़िया में नवंबर की वो शाम बहुत ठंडी थी। मीरा अपने हॉस्टल के कमरे में बैठी थी, सामने खुली हुई…
बम्बई, 1952। रेकॉर्डिंग स्टूडियो की सीढ़ियाँ उतरते हुए ज़ोहराबाई के हाथ में वही पुराना काला पर्स था जो उन्होंने 1944 में रत्तन की रेकॉर्डिंग के दिन भी थाम रखा था। उस दिन नौशाद साहब ने कहा था — "ज़ोहराबाई, आज आपने कमाल कर दिया।" आज किसी ने कुछ नहीं कहा। असिस्टेंट ने बस इतना कहा था: "साहब का कहना है… आवाज़ थोड़ी… भारी लगती है इस गाने के लिए।" भारी। वो शब्द सीढ़ियाँ उतरते हुए उनके साथ आया। ताँगे में बैठते हुए भी रहा। घर के दरवाज़े तक। आवाज़ तो हमेशा से भारी थी। अम्बाला में, नाना के घर में,…
फ़िलाडेल्फ़िया में नवंबर की वो शाम बहुत ठंडी थी। मीरा अपने हॉस्टल के कमरे में बैठी थी, सामने…
सुबह साढ़े पाँच बजे वो अब भी उसी आदत से उठ जाता था। बरसों की आदत। उठते ही…
सुबह छह बजे महेश की आँख खुली तो सबसे पहले उसके दाहिने हाथ ने काँपना शुरू किया। ये कोई नई बात नहीं थी। बीस साल…
बैग पर अब भी एक कार्टून मछली बनी थी, जिसका एक पंख धुलते-धुलते फीका पड़ गया था। मीरा कुछ देर उसे हाथ में पकड़े खड़ी…
✨ Angle: यह कहानी पैसे बचाने की नहीं है — यह उस माँ की है जिसने एक सपने में निवेश किया, और अंत में उस…
बंद कमरे की खिड़की से बाहर मुंबई जाग रही थी — हॉर्न, कौवे, किसी इमारत में चलता पानी का मोटर। पर कमरे के अंदर सब…
शाप के बाद की पहली रात थी। चंद्रमा आकाश में ठीक उसी जगह खड़े थे जहाँ हमेशा खड़े होते थे…
अयोध्या के महल में रात गहरी थी। राजा दशरथ अपने पलंग पर लेटे थे — आँखें खुली, पर कुछ नहीं…
क्या आपने कभी सोचा है कि प्यार इतना गहरा भी हो सकता है जो मौत को भी मात दे? एक…
क्या आपने कभी सोचा है कि कोई इंसान जानते-बूझते एक ऐसी राह पर चले, जहाँ हर कदम पर हार तय…
12 मई, 1767 की दोपहर थी। महेश्वर के राजमहल के पीछे, नर्मदा के किनारे, एक चिता तैयार हो रही थी। लकड़ियाँ सूखी थीं। चंदन का तेल पास रखा था। पुरोहित मंत्र दोहरा रहे थे जैसे कोई उन्हें सुन ही नहीं रहा। और महल के भीतर, एक कमरे में, अहिल्याबाई होलकर अपने बेटे मालेराव की लाश के पास बैठी थीं। बेटा बीस साल का था। नौ महीने पहले राजा बना था। आज सुबह मर गया। उससे पहले — बारह साल पहले — पति खंडेराव कुम्भेर के युद्ध में मारा गया था। तब अहिल्या उनतीस की थीं। तब भी चिता पर चढ़ने…
क्या आपने कभी सोचा है कि एक इंसान कितनी मुश्किलें झेल सकता है — सिर्फ इसलिए कि वो…
क्या आप जानते हैं कि जिस इंसान ने पूरे देश को भूख से लड़ना सिखाया, वो खुद बचपन…
रिमझिम सबसे छोटा जुगनू था। इतना छोटा कि जब वो उड़ता, तो उसकी रोशनी ज़मीन तक भी मुश्किल से पहुँचती। बाकी जुगनू उसे देखकर हँसते।…
जंगल में सबसे पुराना पेड़ था बरगद बाबा। उनकी जड़ें ज़मीन के नीचे इतनी दूर तक फैली थीं कि वो जानते थे कौन सी चींटी…
जंगल के उस कोने में कोई नहीं आता था जहाँ हरिया लकड़ी काटने जाता था। पेड़ वहाँ टेढ़े-मेढ़े थे, ज़मीन पथरीली थी, और रास्ता ऐसा…
क्या आपने कभी देखा है कि बच्चे कितने सवाल पूछते हैं? “यह क्यों होता है?”, “वो कैसे होता है?”, “यह कहाँ से आया?” और हम…
रात के तीसरे पहर में राजा विक्रमादित्य ने अपना मुकुट उतारा, अपनी अंगूठियाँ उतारीं, और एक फटी हुई चादर ओढ़…
पहले दिन वो सिक्का मिट्टी से ऐसे निकला जैसे कोई आलू निकलता है। हलधर की कुदाल टकराई, एक खनखनाहट हुई…
जंगल के उस कोने में कोई नहीं आता था जहाँ हरिया लकड़ी काटने जाता था। पेड़ वहाँ टेढ़े-मेढ़े थे, ज़मीन…
क्या आपने कभी देखा है कि बच्चे कितने सवाल पूछते हैं? “यह क्यों होता है?”, “वो कैसे होता है?”, “यह…
बैग पर अब भी एक कार्टून मछली बनी थी, जिसका एक पंख धुलते-धुलते फीका पड़ गया था। मीरा कुछ देर उसे हाथ में पकड़े खड़ी रही। कल इसी बैग को लेकर उसे अस्पताल जाना था — अपनी पहली कीमोथेरेपी के लिए। लखनऊ की उस गली में इस वक़्त सिर्फ़ एक कुत्ते के भौंकने की आवाज़ आ रही थी। बाक़ी सब चुप था। पति राकेश दूसरे कमरे में सोने का नाटक कर रहे थे — मीरा को पता था कि वो सो नहीं रहे। पिछले बारह दिनों से इस घर में कोई ठीक से सोया नहीं था। बारह दिन पहले डॉक्टर…
एक जुलाई की सुबह, जब सातवीं बी के बच्चे अपनी नई क्लास में घुस रहे थे, हरिप्रसाद शर्मा…
रविवार की दोपहर थी। बाहर पुणे की गर्मी अपने आखिरी दिन गिन रही थी, और बरामदे में पापा…
क्या आपने कभी सोचा है कि जब समंदर की लहरें और जंगल की खामोशी आपस में टकराती हैं, तो वहां की जिंदगी कैसी होती होगी?…
“क्या आपने कभी महसूस किया है कि आपकी ज़िंदगी एक रेस है? एक ऐसी रेस, जिसमें हर कदम पर चुनौतियाँ और मुश्किलें आपका रास्ता रोकती…
क्या आपने कभी सोचा है कि एक युवा, जिसने बचपन में हर बात पर सवाल उठाए, हर परंपरा को चुनौती दी, वही आगे चलकर दुनिया…
एक शाम, महाराष्ट्र के सह्याद्रि पहाड़ों की गोद में बसे एक छोटे से गाँव में, दादाजी कोंडदेव अपने पोते के साथ बैठे थे। सूरज ढल…
क्या आपने कभी गौर किया है कि जब हम सुबह आईने के सामने खड़े होते हैं, तो हम क्या ढूंढ…
क्या आपने कभी सोचा है कि सड़क किनारे लगने वाले ठेले पर, गर्मागर्म गोलगप्पे आपको कोई इंसान नहीं, बल्कि एक…
परिचय (Introduction) क्या आपने कभी किसी का बेसब्री से इंतज़ार किया है? इतना कि दरवाज़े पर होने वाली हर दस्तक…
क्या आपने कभी किसी ऐसी चीज़ को खोया है, जिसकी कीमत पैसों से कहीं ज़्यादा थी? कोई ऐसी चीज़, जिससे…
अठारहवें दिन की शाम को, जब युद्ध समाप्त हो चुका था, गांधारी ने पहली बार अपनी आँखों की पट्टी खोली। एकतीस वर्ष। एकतीस वर्ष से उसकी आँखें इस पट्टी के पीछे बंद थीं। पट्टी जिसे उसने गांधार में अपने विवाह की रात, अपने हाथों से बाँधा था। रेशमी कपड़े की वो पट्टी — जो प्रेम थी, जो प्रतिज्ञा थी, जो उसने सोचा था कि पुण्य है। रोशनी आँखों में चुभी। जैसे किसी ने लोहे की सुई चुभो दी हो। और फिर उसने देखा। कुरुक्षेत्र का वो मैदान जो अब कब्रिस्तान था। दुर्योधन — उसका पहलौठा बेटा — जमीन पर पड़ा…